August 1, 2026
बुआ की चुदाई

उस रात बुआ ने जो कहा – 3

  • June 7, 2026
  • 1

उस रात बुआ ने जो कहा – 2 सुबह की हल्की धूप खिड़की से अंदर आ रही थी। बारिश अब रुक चुकी थी, लेकिन रात की वो बातें

उस रात बुआ ने जो कहा – 2

सुबह की हल्की धूप खिड़की से अंदर आ रही थी।

बारिश अब रुक चुकी थी, लेकिन रात की वो बातें अब भी मेरे दिमाग में घूम रही थीं।

मैं सोफे पर बैठा था… और बार-बार वही पल याद आ रहा था।

वो आखिरी “Good Night”…
और फिर गाल पर हल्का सा kiss।

मुझे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर रात को जो हुआ… वो सच था या सिर्फ एक अजीब सा सपना।

तभी किचन से चाय की खुशबू आने लगी।

मैं धीरे से उठा और अंदर गया।

बुआ किचन में खड़ी चाय बना रही थीं।

आज वो पहले से अलग लग रही थीं। चेहरे पर वही मुस्कान थी… लेकिन आँखों में हल्की सी शर्म भी थी।

उन्होंने मेरी तरफ देखा।

“Good Morning…”

मैं कुछ सेकंड चुप रहा।

“Good Morning…”

कुछ पल तक दोनों के बीच अजीब सी खामोशी रही।

फिर बुआ हल्का सा मुस्कुराईं।

“ऐसे क्या देख रहे हो?”

“कुछ नहीं…”

“झूठ।”

मैं हँस पड़ा।

लेकिन सच तो ये था कि मैं अब भी रात वाली बात सोच रहा था।

बुआ ने दो कप में चाय डाली और एक कप मेरी तरफ बढ़ा दिया।

हम दोनों बालकनी में जाकर बैठ गए।

बारिश रुक चुकी थी। सड़कें पूरी तरह भीगी हुई थीं और मौसम बहुत शांत लग रहा था।

“कल की रात काफी अजीब थी ना…” बुआ ने धीरे से कहा।

मैंने उनकी तरफ देखा।

“हाँ…”

“तुम शायद अभी भी वही सोच रहे हो।”

मैं कुछ बोल नहीं पाया।

उन्होंने चाय का कप नीचे रखा और धीरे से बोलीं,

“कभी-कभी इंसान कुछ बातें बहाव में बोल देता है…”

मेरा दिल अचानक थोड़ा भारी सा हो गया।

“मतलब?”

“मतलब… रात का मौसम, बारिश, अकेलापन… सब कुछ अलग था।”

मैं चुप हो गया।

कुछ सेकंड तक सिर्फ हवा की आवाज़ सुनाई देती रही।

फिर बुआ ने मेरी तरफ देखकर कहा,

“लेकिन एक बात सच थी।”

“क्या?”

“तुम सच में बड़े हो गए हो।”

मैं हल्का सा मुस्कुरा दिया।

“और शायद पहली बार मैंने तुम्हें अलग नजर से देखा।”

दिल फिर तेजी से धड़कने लगा।

लेकिन इस बार उनकी आवाज़ में पहले वाली शरारत नहीं थी… बल्कि एक सच्चाई थी।

“लेकिन कुछ रिश्तों की एक सीमा होती है,” उन्होंने धीरे से कहा।

मैं समझ गया वो क्या कहना चाहती थीं।

उन्होंने मेरी तरफ देखकर मुस्कुराने की कोशिश की।

“जो कल रात हुआ… उसे एक खूबसूरत याद की तरह रहने देते हैं।”

मैंने धीरे से पूछा,
“और अगर मैं उसे भूल ना पाया तो?”

बुआ कुछ पल चुप रहीं।

फिर धीरे से बोलीं,

“कुछ यादें भूलने के लिए नहीं होतीं… बस संभालकर रखने के लिए होती हैं।”

मेरे पास कोई जवाब नहीं था।

उस समय पहली बार मुझे एहसास हुआ कि रात की वो feelings शायद सिर्फ उस मौसम, उस अकेलेपन और उस पल की वजह से थीं।

लेकिन फिर भी…

वो रात खास थी।

बहुत खास।

तभी बाहर कार के हॉर्न की आवाज़ आई।

“लगता है तुम्हारे मम्मी-पापा आ गए,” बुआ बोलीं।

मेरा दिल अचानक अजीब सा हो गया।

सब कुछ इतनी जल्दी खत्म हो जाएगा… मैंने सोचा नहीं था।

बुआ उठीं और अपना बैग लेने कमरे में चली गईं।

कुछ देर बाद जब वो वापस आईं तो फिर वही normal वाली smile उनके चेहरे पर थी।

जैसे रात की वो बातें सिर्फ हम दोनों के बीच कहीं छुप गई हों।

उन्होंने दरवाजे के पास आकर कहा,

“अपना ध्यान रखना।”

“आप भी…”

फिर वो कुछ सेकंड तक मुझे देखती रहीं।

और धीरे से बोलीं,

“वैसे… तुम पर दाढ़ी अच्छी लगती है।”

मैं हँस पड़ा।

“आप फिर शुरू हो गईं।”

वो भी हँस दीं।

बाहर कार फिर हॉर्न देने लगी।

“चलती हूँ।”

मैंने दरवाज़ा खोला।

बुआ बाहर निकल गईं।

लेकिन जाते-जाते अचानक वो वापस मुड़ीं…

और धीरे से बोलीं,

“और हाँ… बारिश वाली रातों से अब मुझे इतना डर नहीं लगेगा।”

मैं बस उन्हें जाता हुआ देखता रह गया।

उनकी कार धीरे-धीरे दूर चली गई।

बारिश रुक चुकी थी…

लेकिन उस रात की यादें अब भी मेरे अंदर कहीं बाकी थीं।

शायद कुछ कहानियाँ पूरी होकर भी अधूरी रह जाती हैं…

और शायद यही उनकी सबसे खूबसूरत बात होती है।

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