उस रात बुआ ने जो कहा – 2
- June 7, 2026
- 2
उस रात बुआ ने जो कहा – 1 बाहर लगातार बारिश हो रही थी… बालकनी से आती ठंडी हवा पूरे माहौल को और अजीब बना रही थी। मैं
उस रात बुआ ने जो कहा – 1 बाहर लगातार बारिश हो रही थी… बालकनी से आती ठंडी हवा पूरे माहौल को और अजीब बना रही थी। मैं
बाहर लगातार बारिश हो रही थी…
बालकनी से आती ठंडी हवा पूरे माहौल को और अजीब बना रही थी। मैं वहीं खड़ा था और बुआ की कही हुई बात बार-बार दिमाग में घूम रही थी—
“तुम अब बच्चे नहीं रहे…”
मेरे पास कोई जवाब नहीं था।
दिल बहुत तेजी से धड़क रहा था।
बुआ कुछ सेकंड तक मेरी आँखों में देखती रहीं, फिर हल्का सा मुस्कुराकर वापस हॉल की तरफ चली गईं।
मैं भी उनके पीछे अंदर आ गया।
कमरे में अभी भी हल्की मोमबत्ती जल रही थी। उसकी पीली रोशनी में पूरा हॉल किसी फिल्म के सीन जैसा लग रहा था।
“इतने चुप क्यों हो गए?” बुआ ने सोफे पर बैठते हुए पूछा।
“कुछ नहीं… बस सोच रहा हूँ।”
“क्या सोच रहे हो?”
मैंने उनकी तरफ देखा लेकिन कुछ बोल नहीं पाया।
वो हल्का सा हँस दीं।
“तुम्हें ना… अपनी feelings छुपाना बिल्कुल नहीं आता।”
“ऐसी कोई बात नहीं।”
“सच?”
मैंने नजरें दूसरी तरफ घुमा लीं।
बाहर फिर जोर से बिजली चमकी।
इस बार बुआ थोड़ा डरकर मेरे और करीब आ गईं।
“आपको सच में बहुत डर लगता है।”
“हाँ… बचपन से।”
“फिर तो आज की रात लंबी होने वाली है।”
वो हल्का सा मुस्कुराईं।
कुछ पल तक हम दोनों चुप बैठे रहे।
फिर अचानक बुआ ने पूछा,
“तुम्हें कभी ऐसा लगा कि कुछ लोग हमारी जिंदगी में बहुत अचानक आते हैं… लेकिन फिर भी बहुत अपने लगते हैं?”
मैंने धीरे से कहा,
“शायद…”
“शायद नहीं… होता है ऐसा।”
उनकी आवाज़ पहले से काफी धीमी थी।
पता नहीं क्यों उस रात उनकी हर बात दिल पर सीधा असर कर रही थी।
मैंने माहौल बदलने के लिए कहा,
“कॉफी पियोगी?”
“अगर तुम बनाओगे तो।”
मैं मुस्कुरा दिया और किचन में चला गया।
जब मैं कॉफी बनाकर वापस आया तो बुआ खिड़की के पास खड़ी बाहर बारिश देख रही थीं।
उनके खुले बाल हवा में उड़ रहे थे।
कुछ सेकंड के लिए मैं बस उन्हें देखता रह गया।
“क्या हुआ?” उन्होंने पीछे मुड़कर पूछा।
“कुछ नहीं…”
“आज बहुत कुछ ‘कुछ नहीं’ हो रहा है।”
मैं हँस पड़ा।
हम दोनों कॉफी लेकर फिर सोफे पर बैठ गए।
रात के लगभग डेढ़ बज चुके थे।
पूरे घर में सिर्फ हम दोनों थे… और बाहर लगातार बारिश हो रही थी।
“वैसे तुम्हें किस तरह की लड़की पसंद है?” बुआ ने अचानक पूछा।
मैं थोड़ा हँसा।
“ये कैसा सवाल है?”
“सामान्य सवाल है।”
“पता नहीं… शायद simple।”
“बस simple?”
“और… caring।”
“और?”
मैंने मजाक में कहा,
“जो अच्छी चाय बना ले।”
बुआ हँस पड़ीं।
“मतलब मेरी तरह?”
मैं कुछ सेकंड के लिए चुप हो गया।
फिर धीरे से बोला,
“शायद…”
वो मुझे देखते हुए मुस्कुराईं लेकिन इस बार उनकी मुस्कान थोड़ी अलग थी।
तभी अचानक बहुत तेज हवा चली और खिड़की जोर से बंद हुई।
बुआ डरकर तुरंत मेरे हाथ को पकड़ बैठीं।
इस बार उन्होंने हाथ जल्दी नहीं छोड़ा।
मेरी धड़कन और तेज हो गई।
मैं उनकी तरफ देखने लगा।
वो भी मुझे ही देख रही थीं।
उस पल ऐसा लग रहा था जैसे बाहर की सारी आवाजें रुक गई हों।
फिर धीरे से उन्होंने हाथ छोड़ दिया।
“Sorry…”
“It’s okay…”
लेकिन अब माहौल पूरी तरह बदल चुका था।
मैंने पहली बार महसूस किया कि हम दोनों के बीच अजीब सी खामोशी आ गई है।
ऐसी खामोशी… जिसमें बहुत सारी बातें छुपी होती हैं।
बुआ धीरे से बोलीं,
“तुम्हारे साथ बैठकर अच्छा लगता है।”
मैं कुछ बोल नहीं पाया।
दिल की धड़कन साफ सुनाई दे रही थी।
तभी अचानक बिजली फिर चली गई।
पूरा घर फिर अंधेरे में डूब गया।
“ओह नो…” बुआ धीरे से बोलीं।
अंधेरे में वो शायद बैलेंस खो बैठीं और सीधे मेरी तरफ आ गईं।
मैंने तुरंत उन्हें संभाल लिया।
कुछ सेकंड तक वो बिल्कुल मेरे करीब थीं।
इतना करीब कि उनकी सांसों की गर्माहट तक महसूस हो रही थी।
हम दोनों बिल्कुल चुप थे।
फिर उन्होंने धीरे से कहा,
“Thank you…”
“कोई बात नहीं।”
लेकिन ना वो पीछे हट रही थीं… ना मैं।
बाहर बारिश लगातार हो रही थी।
दिल की धड़कनें इतनी तेज थीं कि जैसे पूरा कमरा सुन सकता हो।
फिर अचानक इन्वर्टर की हल्की लाइट ऑन हुई।
हम दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा…
और तुरंत थोड़ा पीछे हट गए।
बुआ हल्का सा मुस्कुराईं।
“ये रात बहुत अजीब है।”
“हाँ…”
“लेकिन अच्छी भी।”
मैं बस उन्हें देखता रह गया।
तभी उन्होंने धीरे से पूछा,
“अगर मैं तुमसे कुछ personal पूछूँ तो बुरा तो नहीं मानोगे?”
“नहीं।”
“कभी किसी के करीब आने का मन नहीं किया?”
मैं कुछ सेकंड चुप रहा।
“पता नहीं…”
“झूठ।”
“आपको हर बात झूठ क्यों लगती है?”
“क्योंकि तुम्हारी आँखें सच बता देती हैं।”
मैं हँस पड़ा।
फिर अचानक बुआ भी हँसने लगीं।
उस पल पहली बार माहौल थोड़ा हल्का लगा।
लेकिन अंदर ही अंदर कुछ बदल चुका था।
रात अब काफी हो चुकी थी।
घड़ी में लगभग 2 बज रहे थे।
“चलो अब सच में सोना चाहिए,” मैंने कहा।
“हम्म…”
लेकिन इस बार बुआ तुरंत नहीं उठीं।
वो कुछ सेकंड तक मुझे देखती रहीं।
फिर धीरे से बोलीं,
“आज की रात शायद मैं कभी नहीं भूलूँगी…”
मैं चुप रहा।
दिल फिर तेजी से धड़कने लगा।
फिर अचानक उन्होंने आगे बढ़कर मेरे गाल पर हल्का सा kiss किया।
मैं पूरी तरह freeze हो गया।
मुझे समझ ही नहीं आया कि अभी क्या हुआ।
वो हल्का सा मुस्कुराईं।
“Good Night…”
और धीरे-धीरे कमरे की तरफ चली गईं।
मैं वहीं सोफे पर बैठा रह गया।
बाहर बारिश अभी भी हो रही थी…
लेकिन अब मेरे अंदर उससे भी बड़ा तूफान चल रहा था…
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